
आगरा का ताजमहल एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह इसकी खूबसूरती नहीं बल्कि एक बार फिर उभरता हुआ ‘तेजोमहालय’ बनाम ताजमहल का पुराना विवाद है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आगरा में उस समय अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया, जब अखिल भारतीय हिंदू महासभा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी गोमूत्र लेकर ताजमहल परिसर की ओर बढ़ने लगे। पुलिस की मुस्तैदी और घंटों चली नोकझोंक के बाद मामला हिरासत तक पहुँच गया।
महाशिवरात्रि पर ‘तेजोमहालय’ का दांव
रविवार को जब पूरा देश शिव की भक्ति में लीन था, ताजनगरी आगरा में एक अलग ही हलचल देखने को मिली। अखिल भारतीय हिंदू महासभा के मंडल महामंत्री नीतेश भारद्वाज अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार ताजमहल के पश्चिमी गेट पर पहुँचे। पीले वस्त्रों में सजे और सिर पर केसरिया साफा बांधे नीतेश के हाथों में एक कलश था। दावा किया गया कि इस कलश में ‘गंगाजल’ नहीं बल्कि ‘गोमूत्र’ है, जिससे वे ताजमहल (जिसे वे तेजोमहालय शिव मंदिर मानते हैं) का शुद्धिकरण करना चाहते थे।
बैरियर पर पुलिस और नेता के बीच तीखी नोकझोंक
नीतेश भारद्वाज जैसे ही पश्चिमी गेट के सुरक्षा घेरे की ओर बढ़े, वहां तैनात सतर्क पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। पुलिस को इस विरोध प्रदर्शन की भनक पहले से ही थी, इसलिए बैरियर पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। करीब 15 मिनट तक पुलिस और हिंदूवादी नेता के बीच बीच सड़क पर बहस चलती रही।
नीतेश भारद्वाज का आरोप था कि प्रशासन एकतरफा कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने मौके पर मौजूद मीडिया और राहगीरों के सामने कहा, “जब ताजमहल में उर्स के दौरान तीन दिनों तक विशेष रियायतें दी जा सकती हैं, तो हमें महाशिवरात्रि पर अपने आराध्य के स्थान को शुद्ध करने से क्यों रोका जा रहा है?”
पर्यटकों के बीच कौतूहल और पुलिस की सख्ती
यह पूरा घटनाक्रम ताजमहल के उस रास्ते पर हुआ जहाँ हजारों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक मौजूद थे। अचानक हुई इस नारेबाजी और हंगामे को देखकर पर्यटक भी ठिठक गए। स्थिति को बिगड़ता देख और सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए पुलिस ने नरमी छोड़ सख्त रुख अख्तियार किया।
जब नीतेश भारद्वाज बैरियर पार कर अंदर जाने की जिद पर अड़ गए, तो पुलिस ने उन्हें खदेड़ना शुरू किया। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब पुलिसकर्मी उन्हें खींचते हुए लगभग 150 मीटर दूर ताजगंज थाने ले गए। इस दौरान नेता और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जिसके वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
भेदभाव का आरोप: उर्स बनाम महाशिवरात्रि
हिरासत में लिए जाने के दौरान नीतेश भारद्वाज ने प्रशासन पर तुष्टीकरण का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ताजमहल परिसर के भीतर ‘गोमांस खाने वालों’ को उर्स के दौरान प्रवेश और कार्यक्रम की अनुमति मिलती है, लेकिन एक हिंदू कार्यकर्ता को गोमूत्र लेकर जाने से रोका जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आस्था के मानक अलग-अलग धर्मों के लिए अलग हैं?
यह पहली बार नहीं है जब ताजमहल के भीतर धार्मिक गतिविधियों को लेकर विवाद हुआ है। इससे पहले भी कई बार दक्षिणपंथी समूहों द्वारा यहाँ शिव चालीसा पढ़ने या पूजा करने की कोशिशें की गई हैं, जिन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियमों के तहत प्रतिबंधित किया गया है।
ताजमहल की सुरक्षा और वैधानिक स्थिति
ताजमहल वर्तमान में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF और स्थानीय पुलिस के पास है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार, परिसर के भीतर किसी भी नई धार्मिक गतिविधि या ऐसी क्रियाओं पर रोक है जो इसकी ऐतिहासिक गरिमा को प्रभावित कर सकें। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी और किसी को भी प्रतिबंधित क्षेत्र में अशांति फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।



