
आगरा। ताजनगरी के सबसे व्यस्ततम इलाकों में शुमार मदिया कटरा तिराहे पर मंगलवार दोपहर एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया। जलकल विभाग की हफ्तों पुरानी लापरवाही आज मासूम बच्चों की जान पर बन आई थी। पानी की पाइपलाइन में लंबे समय से हो रहे रिसाव के कारण सड़क के नीचे की जमीन पूरी तरह खोखली हो चुकी थी, जिसके चलते बीच सड़क पर मिट्टी धंस गई और बच्चों से भरी एक स्कूल बस उसमें जा फंसी। बस के फंसते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और चारों तरफ जाम का सैलाब उमड़ पड़ा।
खोखली सड़क और विभाग की अनदेखी: आखिर जिम्मेदार कौन?
मदिया कटरा तिराहा वह स्थान है जहाँ से रोजाना हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों का कहना है कि पिछले चार-पांच दिनों से सड़क के नीचे पाइपलाइन से पानी का रिसाव हो रहा था। कई बार संबंधित विभाग को सूचना दी गई, लेकिन ‘सब ठीक है’ का रवैया अपनाने वाले अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
धीरे-धीरे पानी ने सड़क के भीतर की मिट्टी को काट दिया, जिससे ऊपरी हिस्सा तो सलामत दिखा, लेकिन नीचे मौत का जाल बिछ चुका था। जैसे ही स्कूली बच्चों को घर छोड़ने जा रही बस इस हिस्से पर पहुँची, अचानक सड़क धंस गई और बस का एक हिस्सा जमीन में समा गया। बस में सवार बच्चों की चीखें सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े।
विधायक पुरुषोत्तम खण्डेलवाल ने मौके पर संभाला मोर्चा
हादसे की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय पार्षद अमित पटेल और विक्रांत मौके पर पहुँचे और तुरंत विधायक पुरुषोत्तम खण्डेलवाल को सूचित किया। विधायक खण्डेलवाल बिना देरी किए घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने जब स्थिति देखी, तो उनका पारा चढ़ गया। सड़क का बड़ा हिस्सा धंस चुका था और बस को निकालने की कोई व्यवस्था मौके पर मौजूद नहीं थी।
विधायक ने तत्काल जलकल विभाग के महाप्रबंधक (GM) को फोन लगाकर कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि समय रहते मरम्मत हो गई होती, तो आज मासूमों की जान जोखिम में न पड़ती। विधायक के हस्तक्षेप के बाद विभाग हरकत में आया और जेसीबी मशीन को मौके पर भेजा गया।
घंटों लगा रहा भीषण जाम, अभिभावकों की बढ़ी चिंता
दोपहर का समय स्कूलों की छुट्टी का होता है। बस फंसने के कारण मदिया कटरा से दिल्ली गेट और मानसिक स्वास्थ्य केंद्र (Mental Hospital) तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह ठप हो गया। भीषण गर्मी और ऊपर से घंटों लंबा जाम—स्कूली वाहनों में बैठे बच्चे पसीने से तर-बतर हो गए।

अभिभावक, जो अपने बच्चों का घर पर इंतजार कर रहे थे, जाम की सूचना मिलते ही बेचैन हो उठे। कई लोग पैदल ही अपने बच्चों को लेने मौके पर पहुँच गए। पुलिस प्रशासन को यातायात सुचारू करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन सड़क के बीचों-बीच गड्ढे और बस के फंसे होने के कारण स्थिति घंटों तक तनावपूर्ण बनी रही।
क्या पुरानी पाइपलाइनें बन रही हैं शहर के लिए खतरा?
यह कोई पहली घटना नहीं है जब आगरा की सड़कों पर इस तरह के गड्ढे देखने को मिले हों। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी की पाइपलाइनें दशकों पुरानी हो चुकी हैं। आए दिन लीकेज की समस्या बनी रहती है।
स्थानीय निवासी ने बताया, “हम रोज देखते हैं कि पानी बह रहा है, लेकिन अधिकारी एसी कमरों से बाहर नहीं निकलते। आज तो गनीमत थी कि बस पलटी नहीं, वरना कितने परिवारों के चिराग बुझ जाते, इसका अंदाजा लगाना भी डरावना है।
“मरम्मत कार्य शुरू, जनता में अब भी आक्रोश
जेसीबी की मदद से बस को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है और बच्चों को दूसरे वाहनों से उनके गंतव्य तक पहुँचाया गया। फिलहाल जलकल विभाग की टीम गड्ढे को खोदकर लीकेज ठीक करने और सड़क की मरम्मत के काम में जुटी है। लेकिन जनता का सवाल वही है—क्या प्रशासन हमेशा किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है?विधायक पुरुषोत्तम खण्डेलवाल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि पूरे क्षेत्र की लाइनों की जांच की जाए और जहाँ भी रिसाव की संभावना हो, उसे तत्काल ठीक किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।



