
CGST (केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर) की बड़ी कार्रवाई: कारोबारियों की तलाश शुरू, टैक्स चोरी का नया तरीका बेनकाब
आगरा: केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) आगरा की टीम ने टैक्स चोरी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें फर्जी बिलों के सहारे ट्रेनों के माध्यम से देशभर में जूतों की अवैध सप्लाई की जा रही थी। रविवार देर रात तक चली कार्रवाई में लगभग 1.25 करोड़ रुपये मूल्य के 16,000 जोड़ी से अधिक पैक किए हुए जूते जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई इस बात को उजागर करती है कि आगरा के कुछ कारोबारी संगठित तरीके से सरकारी खजाने को चूना लगा रहे थे।
कैसे किया जा रहा था यह गोरखधंधा?
फर्जी बिल और रेलवे पार्सल सेवा का दुरुपयोगCGST आगरा की एंटी इवेजन शाखा को विशिष्ट सूचना मिली थी कि कारोबारी जीएसटी (GST) से बचने के लिए फर्जी (नकली) बिलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन जूतों को बिना किसी वैध टैक्स भुगतान के, रेलवे की पार्सल सेवा का फायदा उठाते हुए, देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जा रहा था।
गोदाम पर छापा और बड़ी बरामदगी
सूचना के आधार पर, CGST टीम ने कलेक्ट्रेट के नजदीक राधा वल्लभ की बगीची स्थित एक गोदाम पर शनिवार रात छापा मारा। रविवार रात तक चली गहन तलाशी के बाद, गोदाम से 16,000 से अधिक जोड़ी पैक किए हुए जूते बरामद किए गए, जिनके संबंध में कोई बिल या वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका। जब्त किए गए माल की अनुमानित बाजार कीमत सवा करोड़ रुपये (1.25 करोड़) आंकी गई है।
देशव्यापी सप्लाई चेन का खुलासा
शुरुआती पूछताछ में गोदाम संचालक अमित सिंह ने बताया कि वह लंबे समय से GST से बचने के लिए यह काम कर रहा था। जूतों की खेप उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों जैसे लखनऊ, कानपुर और मेरठ के अलावा दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे दूर-दराज के राज्यों में भी भेजी जा रही थी। इस पूरे काम में एजेंटों की मदद ली जा रही थी ताकि टैक्स चोरी का यह जाल बिछाया जा सके।
आगे की कार्रवाई: असली मालिकों की पहचान
CGST विभाग अब जब्त किए गए माल के असली मालिकों और इस टैक्स चोरी के रैकेट में शामिल अन्य कारोबारियों की तलाश में जुट गया है। यह कार्रवाई आगरा के जूता उद्योग में टैक्स अनुपालन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विभाग का कहना है कि इस मामले से जुड़े सभी बड़े और छोटे कारोबारियों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।




